British Council Activity Way to Fitness With Fun

Friday, May 22, 2015

Diarrhea

डायरिया (Diarrhea)

परिचय:-

डायरिया रोग बच्चों में बहुत ज्यादा फैलने वाला रोग है। लेकिन कुछ स्थितियों में यह रोग बड़े व्यक्तियों को भी हो सकता है। जब कोई व्यक्ति मौसम के अनुसार भोजन सम्बंधी नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके पाचनअंगों की कार्यशैली प्रभावित हो जाती है उस व्यक्ति को डायरिया रोग हो जाता है।
          सर्दी के मौसम में शरीर के सभी अंगों की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं जिसके कारण व्यक्ति को कब्ज रोग हो सकता है। इसी प्रकार बरसात के मौसम में तथा गर्मी के मौसम में भी स्वस्थ व्यक्ति को डायरिया रोग हो जाता है।

डायरिया रोग होने के लक्षण:-

          इस रोग से पीड़ित रोगी को दस्त होने लगते हैं तथा उसके शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इस कारण से व्यक्ति को अपने शरीर में अधिक कमजोरी और थकावट महसूस होने लगती है। डायरिया रोग के रोगी को उल्टियां और शरीर में बेचैनी भी होने लगती है।

डायरिया रोग होने के कारण:-  

जीवाणुओं या कीटाणुओं द्वारा संक्रमित होने पर या बड़ी आंतों में सूजन तथा घाव होने पर या फिर अन्य किसी बीमारी का उपचार कराने के लिए शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स दवाइयां लेने के कारण व्यक्ति को डायरिया रोग हो जाता है।  
भोजन के प्रति उदासीन रुख अपनाने के कारण भी डायरिया रोग हो सकता है।
हमारी आंतों में पानी को रोकने की क्षमता एक सीमा तक रहती है। जब इस क्षमता से अधिक पानी आंतों में पहुंचता है तो आंते पानी को रोक नहीं पाती है जिसके कारण व्यक्ति को डायरिया रोग हो जाता है।
किसी भोजन को करने से एलर्जी होने की वजह से भी डायरिया रोग हो जाता है।
आंतों में कार्बोहाइड्रेट्स के ठीक तरह से न पचने तथा इसके पेट में पड़े-पड़े सड़ने के कारण भी डायरिया रोग की उत्पत्ति हो जाती है।
अधिक समय तक उत्तेजक दवाइयों का सेवन करने के कारण भी व्यक्ति को डायरिया रोग हो जाता है।
जरूरत से ज्यादा भोजन करने, ठीक समय पर भोजन न करने, मानसिक परेशानियों, डर तथा चिंता के कारण भी डायरिया रोग हो सकता है।
बरसात के दिनों में अधिक रस युक्त फलों तथा सब्जियों का सेवन करने के कारण भी डायरिया रोग हो सकता है।
अधिक वसायुक्त भोजन, मसालेदार भोजन, डिब्बाबंद बनावटी भोजन तथा आंतों में जलन पैदा करने वाला भोजन करना भी डायरिया रोग होने का कारण होता है।
किसी रोग के कारण आंतों के ठीक प्रकार से काम न करने के कारण भी डायरिया रोग हो जाता है।
गर्मियों के दिनों में शरीर से पसीना न निकलने के कारण भी डायरिया रोग हो सकता है, क्योंकि पसीना आने से शरीर की गंदगी बाहर निकलती है और जब यह शरीर से बाहर नहीं निकलती है तो इसके शरीर में जमा होने के कारण व्यक्ति को डायरिया रोग हो जाता है।
डायरिया रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

इस रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले डायरिया रोग होने के कारणों को दूर करना चाहिए। फिर इसके बाद प्राकृतिक चिकित्सा से इस रोग का उपचार करना चाहिए।
यदि रोगी व्यक्ति को बार-बार दस्त हो रहे हों तो उसे दस्त रोकने वाली दवाइयां नहीं खानी चाहिए नहीं तो रोग की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
इस रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में बिस्तर से उठने के बाद कटिस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद पेट पर ठंडी सिंकाई करनी चाहिए।
रोगी व्यक्ति को दिन में कई बार बारी-बारी से ठंडा तथा गर्म स्नान करना चाहिए।
रोगी व्यक्ति को अपने पेट की सफाई करने के लिए एनिमा क्रिया करनी चाहिए तथा दिन में नींबू का रस पानी में मिलाकर पीते रहना चाहिए।
 डायरिया रोग से पीड़ित रोगी को भोजन करने के बाद सबसे पहले सीधी करवट लेकर लेटना चाहिए तथा इसके बाद कम से कम 8 बार गहरी सांस लेनी चाहिए। फिर इसके बाद सीधा लेटना चाहिए तथा कम से कम 15 बार गहरी-गहरी सांस लेनी चाहिए और फिर बाईं करवट लेटकर 30 बार गहरी-गहरी सांस लेनी चाहिए। इस प्रकार से दिन में कई बार व्यायाम के साथ-साथ सांस लेने की क्रिया करने से डायरिया रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
डायरिया रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन तथा यौगिक क्रियाएं भी हैं जिनको कुछ दिनों तक लगातार करने से डायरिया रोग ठीक हो जाता है। ये आसन तथा यौगिक क्रियाएं इस प्रकार हैं- पद्मासन, पर्वतासन, पवन मुक्तासन, वज्रासन, भुंजगासन, धनुरासन, मत्स्यासन तथा योग मुद्रा आदि।
कुछ दिनों तक लगातार सुबह के समय में सांस लेने वाले प्राणायाम करने से डायरिया रोग ठीक हो जाता है।
डायरिया रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में एक गिलास सन्तरे का रस पीना चाहिए।
डायरिया रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में एक गिलास सेब का रस पीना चाहिए तथा इसके बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए। इससे डायरिया रोग जल्दी ठीक हो जाता है।
डायरिया रोग से पीड़ित रोगी को अपनी नाभि के ऊपर तथा चारों तरफ सरसों का तेल लगाना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है।
नींबू के रस के साथ सौंफ का सेवन करने तथा इसके बाद भोजन करने से डायरिया रोग से पीड़ित रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
 जब यह रोग एक दिन में ठीक न हो तो तथा दस्तों में मल का निकलना बंद हो जाए या सिर्फ पानी ही निकलता रहे तो रोगी व्यक्ति को फलों का रस जैसे-अनार का रस अधिक मात्रा में पीना चाहिए या फिर मट्ठे में थोड़ा सा नमक डालकर सेवन करना चाहिए।
इस रोग से पीड़ित रोगी को दिन में कम से कम 3-4 बार केले का सेवन करना चाहिए क्योंकि केला शरीर से निकले हुए द्रव्यों की पूर्ति करता है। केले के सेवन से डायरिया रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
यदि डायरिया रोग से पीड़ित रोगी को उल्टियां होने लगे उसे गाजर का रस थोड़ा सा गर्म करके एक-एक घण्टे के बाद पीते रहना चाहिए। इससे आंतों में बैक्टीरिया की उत्पत्ति रुक जाती है तथा उल्टियां भी बंद हो जाती है।
डायरिया रोग से पीड़ित रोगी को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह जो भी चीजों का सेवन करे वह न तो ज्यादा गर्म हो और न ही ज्यादा ठंडी।
डायरिया रोग से पीड़ित रोगी को कुछ दिनों तक 2 केलों को कुचलकर एक कप दही में मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
अमरूद की कुछ कोमल पत्तियों को पानी में कम से कम 5 मिनट तक उबालकर उसका काढ़ा बनाकर दिन में 3-4 बार पीने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
एक गिलास मट्ठे में 1 चम्मच शहद
मिलाकर दिन में 3-4 बार सेवन करने से डायरिया रोग ठीक हो जाता है।
तुलसी के पत्तों को दिन में कम से कम 4 बार चबाने से डायरिया रोग ठीक हो जाता ह

Thursday, May 21, 2015

Award

Ist National disability excellence award was given on 21st May 2015 by Shri Sandeep Kumar Minster of Social welfare, Govt of NCT of Delhi at Kirori Mal college,University of Delhi.
The Award consisting of trophy and certificate was given to Me and my special students of Akhil Bhartiya Netrahin Sangh got Medals for their Cultural  (Yoga Activities) . It was appreciated and cheered by all present at the venue

Wednesday, May 20, 2015

Healthy Family Day

Celebrate Healthy Family Day

no progress.

If there is no struggle, there is no progress.

Shankh

मंदिर में आरती के समय शंख बजते सभी ने सुना होगा परंतु शंख क्यों बजाते हैं? इसके पीछे क्या कारण है यह बहुत कम ही लोग जानते हैं. भारतीय संस्कृति में शंख को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. माना जाता है कि समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक शंख भी था. पुराणों और शास्त्रों में शंख ध्वनि को कल्याणकारी कहा गया है. इसकी ध्वनि विजय का मार्ग प्रशस्त करती है.

शंख पूजाघर में न रखकर बाजू में तिपाई पर रखें. पूजा के समय शंख को अंदर-बाहर से पीले कपडे द्वारा पोंछकर साफ कर लें. उस पर गंध एवं फूल चढाएं. तुलसी पत्र भी रखें. शंख पर अक्षत न चढाएं. शंख को तिपायी पर रखते समय उसका मुंह अपनी ओर होना चाहिए. शंखनाद करने के बाद शंख का मुख स्वच्छ कर लेंना चाहिये. 

                                               स्वास्थ्य सम्बन्धी लाभ 

1. - शंख बजाने का स्वास्थ्य लाभ यह है प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि वाणी संबंधी विकार भी शंखनाद के सतत अभ्यास से नष्ट हो जाते हैं, यदि कोई बोलने में असमर्थ है या उसे हकलेपन का दोष है तो शंख बजाने से ये दोष दूर होते हैं.

2. - शंख बजाने से कई तरह के फेफड़ों के रोग दूर होते हैं जैसे दमा, कास प्लीहा यकृत और इन्फ्लून्जा आदि रोगों में शंख ध्वनि फायदा पहुंचाती है.

3. - शंख के जल से शालीग्राम को स्नान कराएं और फिर उस जल को यदि गर्भवती स्त्री को पिलाया जाए तो पैदा होने वाला शिशु पूरी तरह स्वस्थ होता है. साथ ही बच्चा कभी मूक या हकला नहीं होता.यदि शंखों में भी विशेष शंख जिसे दक्षिणावर्ती शंख कहते हैं इस शंख में दूध भरकर शालीग्राम का अभिषेक करें. फिर इस दूध को नि:संतान महिला को पिलाएं. इससे उसे शीघ्र ही संतान का सुख मिलता है.

परन्तु गर्भवती स्त्री को शंख नाद का अधिकार नहीं है. इसका कारण ये है कि -शंख फूँकते समय अवयवों पर तनाव आने से गर्भ पर विपरीत प्रभाव पडता है. इसके अलावा गर्भवती स्त्री को नजदीक से शंख की तेज आवाज भी नहीं सुननी चाहिए.

 4. - शंखघोष से निकलने वाला ओम का महानाद मानसिक रोगों की निवृत्ति करता हुआ कुंडलिनी जागरण का सशक्त साधन बनता है. इसमें विशेष प्रकार के कुम्भक (प्राणायाम) की प्रक्रिया सन्नहित होती है, इसलिए यह शरीर के समूचे तंत्रिका तंत्र को उद्वेलित करता है. इसमें प्रसुप्त तंत्र जाग्रत होता है, शंखनाद से समूचे वातावरण की शुद्धि होती है. इसका स्पंदन शुभ और सतोगुणी क्रियाशक्ति का संचार करता है. 

5.- शंख का महत्व धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, वैज्ञानिक रूप से भी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके प्रभाव से सूर्य की हानिकारक किरणें बाधक होती हैं. इसलिए सुबह और शाम शंखध्वनिकरने का विधान सार्थक है. इसकी ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक व्याप्त बीमारियों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं.

6. - इससे पर्यावरण शुद्ध हो जाता है. शंख में गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम जैसे उपयोगी पदार्थ मौजूद होते हैं. इससे इसमें मौजूद जल सुवासित और रोगाणु रहित हो जाता है. इसीलिए शास्त्रों में इसे महा औषधि माना जाता है.
                                                   शंख का पूजा मंत्र -

1. - शंख की पूजा इस मंत्र के साथ की जाती है

त्वं पुरा सागरोत्पन्न: विष्णुनाविघृत:करे देवैश्चपूजित: सर्वथैपाञ्चजन्यनमोऽस्तुते.

2. - या इस मंत्र का प्रयोग भी कर सकते है - शंखमध्ये स्थितं तोयं भ्रमितं विष्णोधरि. अङक्लग्नं मनुष्याणां महापापं व्यपाहति.
 

Praan

》 हम जब श्वास लेते हैं तो भीतर जा रही हवा या वायु पांच भागों में विभक्त हो जाती है या कहें कि वह शरीर के भीतर पांच जगह स्थिर हो जाता हैं।

ये पंचक निम्न हैं- (1)व्यान, (2)समान, (3)अपान, (4)उदान और (5)प्राण।

उक्त से ही चेतना में जागरण आता है और स्मृतियां सुरक्षित रहती है। इसी से मन संचालित होता है तथा शरीर का रक्षण व क्षरण होता रहता है।

उक्त में से एक भी जगह गड़बड़ है तो सभी जगह उससे प्रभावित होती है और इसी से शरीर, मन तथा चेतना भी रोग और शोक से ‍घिर जाते हैं।

चरबी-मांस, आंत, गुर्दे, मस्तिष्क, श्वास नलिका, स्नायुतंत्र और खून आदि सभी प्राणायाम से शुद्ध और पुष्ट रहते हैं।

(1) व्यान : व्यान का अर्थ जो चरबी तथा मांस का कार्य करती है।

(2) समान : समान नामक संतुलन बनाए रखने वाली वायु का कार्य हड्डी में होता है। हड्डियों से ही संतुलन बनता भी है।

(3) अपान : अपान का अर्थ नीचे जाने वाली वायु। यह शरीर के रस में होती है।

(4) उदान : उदान का अर्थ उपर ले जाने वाली वायु। यह हमारे स्नायुतंत्र में होती है।

(5) प्राण : प्राण वायु हमारे शरीर का हालचाल बताती है। यह वायु मूलत: खून में होती है।

Tuesday, May 19, 2015

Om

ॐ के 11 शारीरिक लाभ:

ॐ , ओउम् तीन अक्षरों से बना है।
अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,

"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,

"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।

ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।

ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।

जानीए

ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक
और
अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...

1. ॐ और थायराॅयडः-
ॐ का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

2. ॐ और घबराहटः-
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

3. ॐ और तनावः-
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

4. ॐ और खून का प्रवाहः-
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

5. ॐ और पाचनः-
ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

6. ॐ लाए स्फूर्तिः-
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

7. ॐ और थकान:-
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

8. ॐ और नींदः-
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

9. ॐ और फेफड़े:-
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

10. ॐ और रीढ़ की हड्डी:-
ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

11. ॐ दूर करे तनावः-
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण  करेंगे।
पहला सुख निरोगी काया🙏
From: Yoga Artist 🙏 🙏 🙏 www.sdpsyoga.blogspot.in
अपना ख्याल रखिये,खुश रहें ।

Cold Drink

लहर नहीं, ज़हर हूँ मैं......

पेप्सी बोली कोका कोला ! भारत का इन्सान है भोला।

विदेश से मैं आयी हूँ, साथ मौत को लायी हूँ।

लहर नहीं ज़हर हूँ मैं, गुर्दों पर बढ़ता कहर हूँ मैं।

मेरी पी.एच. दो पॉइन्ट सात, मुझ में गिर कर गल जायें दाँत।

जिंक आर्सेनिक लेड हूँ मैं, काटे आँतों को, वो ब्लेड हूँ मैं।

मुझसे बढ़ती एसिडिटी, फिर क्यों पीते भैया-दीदी ?

ऐसी मेरी कहानी है, मुझसे अच्छा तो पानी है।

दूध दवा है, दूध दुआ है, मैं जहरीला पानी हूँ।

हाँ दूध मुझसे सस्ता है, फिर पीकर मुझको, क्यों मरता है ?

540 करोड़ कमाती हूँ, विदेश में ले जाती हूँ।

शिव ने भी न जहर उतारा, कभी अपने कण्ठ के नीचे।

तुम मूर्ख नादान हो यारो ! पड़े हुए हो मेरे पीछे।

देखो इन्सां लालच में अंधा, बना लिया है मुझको धंधा।

मैं पहुँची हूँ आज वहाँ पर, पीने का नहीं पानी जहाँ पर।

छोड़ो नकल अब अकल से जीयो, जो कुछ पीना संभल के पीयो।

इतना रखना अब तुम ध्यान, घर आयें जब मेहमान।

इतनी तो रस्म निभाना, उनको भी कुछ कस्म दिलाना।

दूध जूस गाजर रस पीना, डाल कर छाछ में जीरा पुदीना।

अनानास आम का अमृत, बेदाना बेलफल का शरबत।

स्वास्थ्यवर्धक नींबू का पानी, जिसका नहीं है कोई सानी।

तुम भी पीना और पिलाना, पेप्सी अब नहीं घर में लाना।

अब तो समझो मेरे बाप, मेरे बचे स्टॉक से करो टॉयलेट साफ।

नहीं तो होगा वो अंजाम, कर दूँगी मैं काम तमाम।

Diabetes

शुगर का इलाज"
१-लहसुन छिला हुआ 25 gm
२-अदरक (ताज़ा) 50 gm
३-पुदीना fresh 50 gm
४-अनारदाना खट्टा 50 gm
इन चारों चीज़ों को पीस कर चटनी बना लें।
और सुबह, दोपहर और शाम को एक-एक चम्मच खा लें।
पुरानी से पुरानी शुगर, यहाँ तक कि शुगर की वजह से
जिस मरीज़ के जिस्म के किसी हिस्से को काटने की
सलाह भी दी गयी हो तब भी ये चटनी बहुत फायदेमंद
इलाज है।
🌿Yoga Artist 🌿 www.sdpsyoga.blogspot.in

Monday, May 18, 2015

Healthy Family Day

Healthy Family Day

Healthy Family Day
16th May 2015
Dr N.V.Kamat (Principal Advisor,  IMA), Dr Neelanjana singh  ( Dietician and certified diabetes educator) and Dr Prachi garg (Sr. Clinical Associate at Moolchand Hospital) they expressed their individual views on Healthy Family Day and also awareness to the parents and students.
On this occasion a book related to children's health was also launched. The students from classes 3rd to 5th presented rhythmic yoga performance which  was appreciated and Praised by all.
The students displayed Healthy food items and also presented cooked Healthy food in their class rooms. Some of the Students also performed yoga in presence of parents in their classes.

Saturday, May 16, 2015

22 Reasons To Believe ancient Bharat Is Based On Science

22 Reasons To Believe ancient Bharat Is Based On Science

                   वृक्ष
People are advised to worship Neem and Banyan tree in the morning. Inhaling the air near these trees, is good for health.

                  योग
If you are trying to look ways for stress management, there can’t be anything other than Hindu Yoga aasan Pranayama (inhaling and exhaling air slowly using one of the nostrils).

                  प्रतिष्ठान
Hindu temples are built scientifically. The place where an idol is placed in the temple is called ‘Moolasthanam’. This ‘Moolasthanam’ is where earth’s magnetic waves are found to be maximum, thus benefitting the worshipper.

                  तुलसी
Every Hindu household has a Tulsi plant. Tulsi or Basil leaves when consumed, keeps our immune system strong to help prevent the H1N1 disease.

                  मन्त्र
The rhythm of Vedic mantras, an ancient Hindu practice, when pronounced and heard are believed to cure so many disorders of the body like blood pressure.

                 तिलक
Hindus keep the holy ash in their forehead after taking a bath, this removes excess water from your head.

                 कुंकुम
Women keep kumkum bindi on their forehead that protects from being hypnotised.

                 हस्त ग्रास
Eating with hands might be looked down upon in the west but it connects the body, mind and soul, when it comes to food.

                 पत्तल
Hindu customs requires one to eat on a leaf plate. This is the most eco-friendly way as it does not require any chemical soap to clean it and it can be discarded without harming the environment.banana; palash leaves

                 कर्णछेदन
Piercing of baby’s ears is actually part of acupuncture treatment. The point where the ear is pierced helps in curing Asthma.

                 हल्दी
Sprinkling turmeric mixed water around the house before prayers and after. Its known that turmeric has antioxidant, antibacterial and anti-inflammatory qualities.

                 गोबर
The old practice of pasting cow dung on walls and outside their house prevents various diseases/viruses as this cow dung is anti-biotic and rich in minerals.

                गोमूत्र
Hindus consider drinking cow urine to cure various illnesses. Apparently, it does balance bile, mucous and airs and a remover of heart diseases and effect of poison.

                शिक्षा
The age-old punishment of doing sit-ups while holding the ears actually makes the mind sharper and is helpful for those with Autism, Asperger’s Syndrome, learning difficulties and behavioural problems.

                दिया 
Lighting ‘diyas’ or oil or ghee lamps in temples and house fills the surroundings with positivity and recharges your senses.

                जनेऊ
Janeu, or the string on a Brahmin’s body, is also a part of Acupressure ‘Janeu' and keeps the wearer safe from several diseases.

                तोरण
Decorating the main door with ‘Toran’- a string of mangoes leaves;neem leaves;ashoka leaves actually purifies the atmosphere.

                चरणस्पर्श
Touching your elder’s feet keeps your backbone in good shape.

               चिताग्नि
Cremation or burning the dead, is one of the cleanest form of disposing off the dead body.

                ॐ
Chanting the mantra ‘Om’ leads to significant reduction in heart rate which leads to a deep form of relaxation with increased alertness.

           हनुमान चालीसा
Hanuman Chalisa, according to NASA, has the exact calculation of the distance between Sun and the Earth.

                शंख
The ‘Shankh Dhwani’ creates the sound waves by which many harmful germs, insects are destroyed. The mosquito breeding is also affected by Shankh blowing and decreases the spread of malaria.